अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस

 
                                                                              
अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस

वर्ष 2005 जब मैं 16 वर्ष का था तब से ही घर से दूर हूँ शुरुआत में स्कूली शिक्षा के लिए गांव से कस्बा आया फिर महाविद्यालयीन शिक्षा के लिए कस्बा से शहर का रुख किया और अब रोजगार के लिए शहर में ही निवासरत हूँ। 
मेरे कक्षा 12वीं पास करने के साल ही पिता जी का आकस्मिक निधन हो गया था। घर में माँ जी दीदी जी और भाई को छोड़कर पढ़ाई के लिए मैं शहर आ गया। 
छोटे से गांव का रहने वाला बालक एका-एक राजधानी रायपुर में आना मेरे लिए एक अलग अनुभव रहा। पिता जी के चले जाने और बड़े शहर में रहने से लोगों को लगता था कि बलवंत भी नशा सीख जाएगा यहाँ तक कि घर में नाते रिश्तेदारों को भी लगता था और शायद आज भी लगता है। लेकिन सच्चाई कुछ और है। मैंने करीब 5 से 6 वर्ष का समय अंतराल को छात्रावास में बिताया है। 
महाविद्यालयीन बालक छात्रावास जहाँ हर प्रकार के बालक रहते हैं जिनमें से एक प्रकार नशा का भी होता है। ऐसे लोगो से मेरी भी करीबी दोस्ती रही है। हम साथ में बैठकर चखना भी चखें हैं। जब पढ़ाई पूरी हुई तो कर्म क्षेत्र में भी ऐसे मित्रो से सम्पर्क हुये। कई बार शराब पीने वालों के साथ बैठे भी, वो शराब पीते और मैं उनका चखना चट कर जाता था। मेरे लिए तो शायद मेरी माँ की दुवा ही रही जिसकी वजह से कभी भी किसी भी मित्र ने मुझे शराब या किसी अन्य नाश के लिए कोई दबाव नहीं डाला।
अभी कार्मिक क्षेत्र में हमारे एक सम्माननीय साथी ने मुझसे पूछा कि आखिर शराब क्यूं नहीं पीता है तब मैंने बड़े ही शालीनता से उनको बताया कि जब से मैं गांव छोड़कर शहर आया तब से कईयों को लगा की शायद मैं भी शराब पीने वालों की संगति में आ जाऊंगा या आ गया हूँ, लेकिन एक इंसान ऐसा भी है जिनको कभी नहीं लगा कि मैं ऐसा कर सकता हूं और वो हैं मेरी माँ, मेरी बहनें और मेरा भाई। मैं हमेशा उनकी आँखों में आँख मिलाकर कह सकता हूँ कि हाँ एक इस आदत को मैंने नहीं अपनाया है और न ही अपनाऊंगा। मुझे लगता है जो हमारे बस में हो उसको तो अवश्य ही करना चाहिये। कम से कम इस क्षेत्र में हम अपने परिवार को सीना चैड़ा करने के लिए मौका दे ही सकते हैं। हर किसी की जरूरत के हिसाब से बाजार में हर प्रकार की वस्तुएं उपलब्ध है, एक तरफ शराब है तो दूसरी तरफ दूध और पौष्टिक फल भी उपलब्ध हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम किसे चुनते हैं।
नशा केवल शराब का हो या फिर धूम्रपान का, वही नशा नहीं है, हर वह चीज जिसका सेवन अति की सीमा पार कर जाए नशा की श्रेणी में आता है। 
मेरी व्यक्तिगत सोच है की शराब पीना कभी गलत नहीं हो सकता है न ही मैं कभी किसी शराब पीने वालों को खराब मानता हूँ। लेकिन शराब के नशे से जो स्थिति घर व परिवार में निर्मित होती है, मुझे दुःख और दिक्कत उस बात से है। हर जुर्म के पीछे शराब का रिश्ता अवश्य होता है चाहे वह छोटा हो या बड़ा। 
              प्रत्येक वर्ष 26 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस‘ मनाया जाता है। नशीली वस्तुओं और पदार्थों के निवारण हेतु ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा‘ ने 7 दिसम्बर, 1987 को प्रस्ताव संख्या 42 ध 112 पारित कर हर वर्ष 26 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस‘ मानाने का निर्णय लिया था। यह एक तरफ लोगों में जागरूकता फैलाता है तो वहीं दूसरी तरफ नशे की लत के शिकार लोगों के उपचार की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। ‘अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस‘ के अवसर पर मादक पदार्थ एवं अपराध से मुकाबले के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र संघ‘ का कार्यालय यूएनओडीसी एक नारा देता है। इस अवसर पर मादक पदार्थों से मुकाबले के लिए विभिन्न देशों द्वारा उठाये गये कदमों तथा इस मार्ग में उत्पन्न चुनौतियों और उनके निवारण का उल्लेख किया जाता है। ‘26 जून‘ का दिन मादक पदार्थों से मुकाबले का प्रतीक बन गया है। इस अवसर पर मादक पदार्थों के उत्पादन, तस्करी एवं सेवन के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराया जाता है। 
डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 25 करोड़ से अधिक लोग सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, गुटखा, पान मसाला किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। पूरे विश्व में धूम्रपान करने वाले लोगों की 12% आबादी भारत में है, तंबाकू से संबंधित बीमारियों से लगभग 50 लाख लोग प्रतिवर्ष असमय मारे जाते हैं। इनमें करीब डेढ़ लाख महिलाएं होती हैं । पूरे विश्व में भारत दूसरे स्थान पर आता है, जहां सबसे अधिक धूम्रपान किया जाता है । हर दिन लगभग 2500 लोगों की मौत धूम्रपान से होती है। एक सिगरेट पीने से जिंदगी के 11 मिनट कम हो जाते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 6 प्रतिशत महिलाएं एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 12 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू से बने उत्पादों का सेवन करती हैं। महिलाओं में स्तन कैंसर के प्रमुख कारणों में ज्यादातर मामलों में अधिक धूम्रपान भी एक कारण के रूप में देखा जा रहा है।
            आईए हम आज इस अवसर पर संकल्प लेें कि, विनाशकारी किसी भी नशा को हम अपने जीवन में नहीं अपनाएंगें और स्वयं तथा परिवारजनों को समाज में सिर ऊंचा करके जीने का सम्मान दिलाएंगे।

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