पहले फलदार फिर छायादार और अब है शोभादार पौधे एवं वृक्ष

पूरा बचपन गांव में बीता। घर, खेत, खार, मैदान और पगडण्डियों पर चलते हुए कब बड़े हो गए पता ही न चला। बारो मासी में ऐसा कोई माह नहीं जब हम खेत न जायें और खेतो में जाकर पेड़ो पर न चढ़े हों। हमारे गांव के खेत में कौउहा, साजा, करही, मुढ़ी, परसा, जाम, कसही, बर, पीपर, नीम, बोहार और घर के बाड़ी मन म बोईर, आमा, इमली, बिही, छिता, पपीता, का पेड़ होते थे यह सभी नाम छत्तीसगढ़ी में लिखा हूँ अगर आप सच में मेरा ब्लॉग पढ़ और पसन्द कर रहे हैं तो थोडा मेहनत से हिंदी नाम निकाल ही लेंगे ऐसा मुझे विश्वाश है। बचपन में कभी जाम खाने, कभी बेर खाने कभी बोहार भाजी तोड़ने, कभी डुमर तो कभी आम खाने, कभी इमली का लाटा बनाने के लिए बड़े से बड़े पेड़ों पर  चढ़ जाते थे। इस चक्कर में कई बार माँ की मार भी खानी पड़ी थी। जो भी हो तब इन्ही सब बदमाशियों से ही शारीरिक रुप से मजबूती भी आती थी। गांव में रहे हर व्यक्ति ने ऐसा समय अपने जीवन में अवश्य जिया होगा जिसे वह आज याद कर बचपन की यादों में खो जाया करता होगा। सच में अब वह समय जीवन में दोबारा आना असंभव है। अब न वह समय रहा और न ही वैसी स्फूर्ति और न ही खेतो में उतने पेड़ बचे हैं, यदि कुछ विशेष वन क्षेत्रों को छोड़ दें तो।

आज कल जल्दी बढ़ने वाले पेड़ या कहें शोभादार पेड़ नगर निगम एवं वन विभाग द्वारा गांव, क़स्बा, शहर सभी जगह लगाये जाते हैं, जबकि पहले फल वाले पेड़ या पीपल, बरगद, शीशम आदि के पेड़ लगाये जाते थे। जल्दी बढ़ने वाले पेड़ बारिश, तूफ़ान, आदि में अक्सर गिर जाते है या किसी न किसी प्रकार की हानि करते है। 
हरियाली प्रसार योजना अन्तर्गत तीन वर्षों में 83 लाख से अधिक पौधों का रोपण एवं वर्ष 2022-23 में 17 करोड़ से अधिक राशि का प्रावधान किया गया है।

रायपुर से वन विभाग के जनसम्पर्क कार्यालय द्वारा 05 अप्रैल 2022 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दिए आंकड़ों के अनुसार वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित ‘‘हरियाली प्रसार’’ योजना के अंतर्गत तीन वर्षों में वर्षा ऋतु 2019, 2020 तथा 2021 में 83 लाख 31 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इससे 07 हजार 400 हेक्टेयर रकबा हरियाली से आच्छादित हुआ है। इसमें हितग्राहियों तथा कृषकों की ओर से पौधों की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए वृद्धि कर वर्ष 2022-23 में इस योजना के अंतर्गत वनेत्तर क्षेत्रों में कृषकों की भूमि पर रोपण के लिए बजट में 17 करोड़ 58 लाख रूपए की राशि का प्रावधान किया गया है। 
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री राकेश चतुर्वेदी के अनुसार हरियाली प्रसार योजना के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में 30 लाख 95 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इस योजना से 13 हजार 651 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। इनमें वन वृत्त रायपुर अंतर्गत 1500 हितग्राहियों द्वारा 25 हजार 730 पौधों तथा कांकेर अंतर्गत 3 हजार 089 हितग्राहियों द्वारा 6 लाख 30 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इसी तरह वन वृत्त सरगुजा अंतर्गत 419 हितग्राहियों द्वारा 99 हजार 250, जगदलपुर अंतर्गत 2 हजार 391 हितग्राहियों द्वारा 3 लाख 80 हजार, दुर्ग अंतर्गत 3 हजार 632 हितग्राहियों द्वारा 3 लाख 59 हजार पौधों तथा बिलासपुर अंतर्गत 2 हजार 620 हितग्राहियों द्वारा 16 लाख पौधों का रोपण किया गया है। इनका रोपण 2 हजार 800 हेक्टेयर रकबा में हुआ है।
हरियाली प्रसार योजना के तहत वर्ष 2019-20 में एक हजार 600 हेक्टेयर रकबा में 18 लाख 56 हजार तथा वर्ष 2020-21 में 3 हजार हेक्टेयर रकबा में 33 लाख 80 हजार पौधों का रोपण हुआ है। इनमें वर्ष 2019-20 में 10 हजार 497 तथा वर्ष 2020-21 में 20 हजार 16 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। योजना के अंतर्गत सागौन, बांस, खम्हार, आंवला, शीशम, चंदन, मीलिया डुबिया, क्लोनल नीलगिरी, टिशू कल्चर बांस, टिशू कल्चर सागौन, आम, कटहल, मुनगा, सीताफल एवं अन्य प्रजातियों के पौधों का रोपण शामिल हैं।
      यह विचारणीय है कि वन विभाग हो या उद्यानिकी विभाग और कुछ सीमा तक कृषि विभाग द्वारा भी इतनी राशि खर्च करने के बाद भी स्वच्छ वायु स्वच्छ वन और फलदार/छायादार वृक्षो की कमी आखिर क्यूँ है..? जिस तरीके से तात्कालिक लाभ या इलाज के लिए हम रसायनयुक्त दवाओं का इस्तेमाल करते हैं उसी प्रकार तात्कालिक हरियाली के लिए बहुत तेजी से बढ़ने वाले शोभादार पौधों का सहारा लेने लगें हैं। इन पौधों से साल भर में ही बड़ी पौधा तेज़ी से विकसित होकर एक विशाल वृक्ष का रूप अवश्य ले लेता है, लेकिन वह न स्थायी होता है और न ही लाभदायक। वह केवल शोभादार होता है जो बहुत ही तेज़ी से बड़ा होता है और इतने ही तेजी से हलके आंधी तूफ़ान में या तो उखड जाता है या फिर क्षतिग्रस्त। 

       क्या हम खुद भी अपने जीवन में कुछ पौधे ऐसे नहीं लगा सकते हैं जो फल देने के साथ ही छाया भी दे सके। जो प्राणदायी वायु भी दें और जिनकी उम्र भी ज्यादा हो। मुझे लगता है सच्ची नीयत हो तो अवश्य ही किया जा सकता है। जहाँ विकास के नाम पर लाखों वृक्षो की कटाई हो रही हो वहीं हम चाहें तो ऐसे पौधों का रोपण करें जो मजबूत होने के साथ ही फलदार व छायादार हों फिर भले ही उनके विकास की गति धीमी क्यों न हों। केवल रोपण ही नहीं बल्कि रोपित पौधें के परिपक्व होने तक सही देखभाल भी कर सकते हैं। यकीन मानिये हमारे केवल एक पौधे से ही क्रांति आ सकती है बशर्ते हम उस पौधे की बढत तक उचित देखभाल करें। आइये आप हम मिलकर यह प्रण लें की इस आसाढ़ महीने में स्वयं एक पौधा अवश्य लगायें नफरतों की बीज बहुत बो लिये आईये अब एक प्राणदायी बीज भी बोयें।

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