‘बुकर पुरस्कार’

                                      

लेखक की किसी भी रचना को जब पढ़ो और पढ़ते वक़्त आप उसमें खुद को जोड़ सको तब मानो उस कृति का लिखा जाना सार्थक माना जाता है। किसी भी नयी लेखक की यही सार्थकता उसकी लेखनीं को धार देने में सहायक सिद्ध होता हैं। और जब आपके रचना को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिले तब लगता है मानो इससे बड़ी उपलब्धि किसी लेखक के लिये और कोई नहीं है। हर कालखंड में अनेक लेखक हुए मैं मानता हूँ जो स्वअनुभव को अपने लेखनी के माध्यम से एक कृति का रूप दे सके जिसे पढ़कर कोई भी व्यक्ति खुद को उस कृति के आस पास भी भावनात्मक जुड़ा मानता है तो उस रचना की सार्थकता सिद्ध हो जाती है। हिंदी के कई महान और महानतम लेखक हुए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया है। अभी हिंदी लेखकों के अलावा पूरा हिंदुस्तान गर्व से कह रहा है कि आज दिन हिंदी लेखकों का है इसका मुख्य कारण हैं 65 वर्षीय गीतांजलि श्री जी जिनकी रचना ’रेत की समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ने हाल ही में बुकर पुरस्कार हासिल किया हैं। हिंदी की जानी मानी लेखिका गीतांजलि श्री हिंदी की पहली लेखिका हैं जिन्हें यह पुरस्कार मिला है। हिंदी में पहली बार किसी रचना को ‘‘बुकर पुरस्कार’’ प्राप्त हुआ  है। हिंदी की महिला लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास ’रेत समाधि’ ने हिंदी को यह सम्मान दिलाया है। ज्ञात हो कि उपन्यास ’रेत समाधि’ का अंग्रेजी अनुवाद डेजी रॉकवेल ने ’टूंब ऑफ सैंड’ के नाम से किया है, जिसने वर्ष 2022 का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीत लिया है। 50,000 पाउंड के पुरस्कार के लिए चुनी जाने वाली ये पहली हिंदी भाषा की पुस्तक है, बुकर पुरस्कार ने अपने एक ट्वीट में ये कहा है। गीतांजलि श्री का यह उपन्यास भारत के विभाजन पृष्ठभूमि में लिखी गई एक कहानी है, जो अपने पति की मृत्यु के बाद एक बुजुर्ग महिला की कहानी पर आधारित है।

‘रेत समाधि’ हिंदी की पहली ऐसी रचना है जो अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की लॉन्ग लिस्ट और शॉर्ट लिस्ट तक पहुंची और जिसने बुकर पुरस्कार जीत भी लिया। बता दें कि बुकर पुरस्कार की लॉन्ग लिस्ट में गीतांजलि श्री की ‘रेत समाधि’ के अलावा 13 अन्य कृतियां भी थीं। ‘रेत समाधि’ गीतांजलि श्री का पांचवां उपन्यास है। इस उपन्याक के बारे में बात करते हुए गीतांजलि श्री ने पुस्तक के कवर पर लिखा है कि “एक बार जब आपको महिला और एक बोर्डर मिल जाए, तो एक फिर कहानी खुद ही तैयार हो जाती है यहां तक कि महिलाएं भी अपने आप में कहानी के लिए काफी हैं। महिलाएं अपने आप में कहानियां हैं।

कौन है गीतांजलि श्री

गीतांजलि श्री ( जिन्हें गीतांजलि पांडे के नाम से भी जाना जाता है, और अपनी मां का पहला नाम श्री अपने अंतिम नाम के रूप में लेती हैं।) भारत की एक हिंदी उपन्यासकार और लघु कथाकार हैं। 

गीतांजलि श्री कई लघु कथाओं और पांच उपन्यासों की लेखिका हैं। उनके 2000 के उपन्यास माई को क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड, वर्ष 2001 के लिए चुना गया था। पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद नीता कुमार ने किया था।

अनूदित पुस्तक को वर्ष 2017 में नियोगी बुक्स द्वारा पुनर्प्रकाशित किया गया था। उनके पांचवें उपन्यास, रेत समाधि (2018) का डेज़ी रॉकवेल द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। टॉम्ब ऑफ सैंड नामक उपन्यास ने वर्ष 2022 का अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता। 

गीतांजलि श्री का जन्म एवं शुरुआती जीवन
गीतांजलि श्री का जन्म 12 जून 1957 को मैनपुरी, उत्तर प्रदेश में था । गीतांजलि श्री पूर्वी भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में पली-बढ़ी, जहाँ उनके पिता एक सिविल सेवक के रूप में तैनात थे। उनके पिता एक सिविल सेवक होने के साथ-साथ एक लेखक भी थे।

गीतांजलि श्री की शिक्षा

श्री ने अपना बचपन यूपी के कई शहरों में बिताया जहां उनके पिता एक सिविल सेवक के रूप में तैनात थे। वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं जहाँ उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में इतिहास का अध्ययन किया, और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया। 
हालाँकि, श्री ने इतिहास छोड़ दिया और डॉक्टरेट के लिए हिंदी को चुना। उसने पीएच.डी. डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1980 के दशक में एमएस यूनिवर्सिटी, बड़ौदा के प्रसिद्ध हिंदी लेखक प्रेमचंद पर, उस समय के आसपास उन्होंने जाकिर हुसैन कॉलेज और जामिया मिलिया इस्लामिया में भी पढ़ाना शुरू किया। 

गीतांजलि श्री का करियर

1980 के दशक में, उनके करियर की शुरुआत प्रमुख हिंदी पब्लिशिंग हाउस, राजकमल ने की थी, जिसकी अध्यक्षता शीला संधू ने की थी।
श्री ने 1987 में अपनी पहली कहानी ‘बेल पत्र’ लिखी थी। उनके पास पांच उपन्यास और कई लघु कहानी संग्रह हैं।
वह अपने पहले उपन्यास, माई के साथ सुर्खियों में आईं, जिसका अंग्रेजी अनुवाद वर्ष 2001 में क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड के लिए चुना गया था। उपन्यास का अंग्रेजी में अनुवाद नीता कुमार ने किया था, जिन्होंने इसके लिए साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार अर्जित किया। 

गीतांजलि श्री का पहला उपन्यास ”माई” महिलाओं के लिए काली पब्लिशर द्वारा प्रकाशित, उपन्यास पाठकों को एक उत्तर भारतीय मध्यवर्गीय परिवार में तीन पीढ़ियों की महिलाओं और उनके आसपास के पुरुषों के जीवन और चेतना की एक झलक देता है। माई का सर्बियाई, उर्दू, फ्रेंच, जर्मन और कोरियाई सहित कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है।

उनका दूसरा उपन्यास ”हमारा शहर उस बरस ”उस समय के आसपास केंद्रित है जब अयोध्या बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सांप्रदायिक हिंसा से त्रस्त था।

साल 2006 में, उन्होंने ” खाली जगह ” उपन्यास प्रकाशित किया, जो हिंसा, हानि और समकालीन दुनिया में पहचान की खोज जैसे विषयों पर केंद्रित है। इसके फ्रेंच अनुवाद का शीर्षक ‘यून प्लेस वीडे’ (2018) है और इसके अंग्रेजी अनुवाद को ‘द एम्प्टी स्पेस’ (2011) कहा जाता है।

साल 2018 में, उन्होंने हिंदी भाषा का उपन्यास ‘रेत समाधि’ लिखा, जो धर्मों, देशों और लिंगों के बीच सीमाओं के विनाशकारी प्रभाव के बारे में बात करता है। उपन्यास हास्य रूप से एक 80 वर्षीय भारतीय महिला की अपने पति की मृत्यु के बाद पाकिस्तान की यात्रा को प्रस्तुत करता है।

उन्हें ”Tom of Sand’‘ उपन्यास के लिए अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली, जो उनके उपन्यास ‘रेत समाधि’ (2018) का अंग्रेजी अनुवाद है। डेज़ी रॉकवेल द्वारा उपन्यास का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था

उनके उपन्यासों और कहानियों का गुजराती, उर्दू, अंग्रेजी, फ्रेंच, साइबेरियन और कोरियाई सहित कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की विजेता-

26 अप्रैल 2022 को, टॉम्ब ऑफ सैंड ने अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता, यह सम्मान प्राप्त करने वाली पहली भारतीय पुस्तक बन गई। गीतांजलि और डेज़ी को 50,000 पाउंड का साहित्यिक पुरस्कार मिला, जिसे उन्होंने समान रूप से विभाजित किया।

अब तक पांच भारतीयों को दिए जा चुके हैं बुकर पुरस्कार

बता दें इसके पहले अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार अब तक 5 भारतीय या फिर भारतीय मूल के लेखकों को दिए जा चुके हैं। इन लेखकों के नाम और उनकी रचनाएँ तथा प्रकाशन वर्ष इस प्रकार हैं।

1. वी.एस. नायपॉल, इन ए फ्री स्टेट (1971)

2. सलमान रुश्दी, मिडनाइट्स चिल्ड्रन (1981)

3. अरुंधति रॉय, द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स (1997)

4. किरण देसाई, द इनहेरिटेंस ऑफ़ लॉस (2006)

5. अरविंद अडिगा, द व्हाइट टाइगर (2008)

नोटः- गीतांजलि श्री के जीवन परिचय को विकिपीडिया के अलावा हिंदी बॉयोग्राफी पर आधारति ब्लॉग Shubham Sirohi जी के ब्लॉग shubhamsirohi.com से लिया गया है।

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