कुछ दिनों पहले मेरे साथ एक घटना घटी, वहीं से ही इस विषय पर लिखना चाहा और मैं मानता हूँ शायद यह आप में से हर किसी के साथ हुई हो या फिर हम खुद भी ऐसा व्यवहार करते हों। दरअसल एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति से मिलना हुआ, वह व्यक्ति इतना महत्वपूर्ण था कि उनका मोबाइल नम्बर केवल 3 संख्याओं के बाद आगे 7 बार शून्य है मतलब ###0000000 अब आप समझ सकते होंगे की वो कितना महत्वपूर्ण होगा या खुद को समझते होंगे। जब उनसे मेरी बात हुई (उनके ही काम की बात) तब मुझसे बहुत ही बेअदबी और बदतमीजी से बात किया उस वक्त मैंने सोचा छोडो न बड़े लोग.. शायद इनका व्यवहार ही ऐसा हो लेकिन जब 5 मिनट बाद उनको उनसे भी बड़े महत्वपूर्ण व्यक्ति ( राजनैतिक) का फोन आया तो मेरे ही सामने बड़े ही सम्मान से जी भईया प्रणाम…. प्रणाम भईया….. से बात की शुरुआत की।  तब यह अहसास हुआ कि नहीं यह तो केवल चमचागिरी और मौका परस्त इंसान है जो जरुरत और मौके के हिसाब से अपने व्यवहार का निर्धारण कर रहा है।।

             यार एक ही चेहरा, एक ही इंसान लेकिन सामने वाले की औकात, ओहदा, सम्बन्ध, परिस्थिति देखकर अपना व्यवहार निर्धारण कर रहे हो तो मैं मानता हूँ आपसे बड़ा मतलबी, चमचा, मौकापरस्त, गिरगिट इंसान और कोई नहीं।

              मैं पूछता हूँ इंसान की परिस्थिति, ओहदा, राजनैतिक और सामाजिक पहचान चाहे जो भी हो क्या हम सभी से समान व्यवहार नहीं रख सकते हैं..? मुझे लगता है हाँ बिलकुल रख सकते हैं बशर्ते बीच में अहम् सामने न आये जो हमें छोटों से बात करने में और बड़ों से बात करने में अंतर बतलाये।

                मुझे अच्छे से याद है अपने स्कूल के दिनों में जब मैं कक्षा ग्यारहवीं में था तब हमारे कक्षा के अंदर दीवारो में कई कोट्स लिखे होते थे उनमें से एक था कि ” दूसरों  के साथ वह व्यवहार न करो जो आपको खुद के लिए पसंद न हो” यह बात तब से ही दिमाग में घर कर गयी है। पता नहीं एक ही चेहरा एक ही इंसान लेकिन व्यवहार अलग-अलग समय और अलग-अलग व्यक्ति के साथ अलग क्यूं रखते हैं यह बात समझ नहीं आई और जितनी समझ आई वो इतना कि मानव समाज अपने समझ-ना-समझ से केवल अपने मतलब के हिसाब से व्यवहार रखता है। वैसे तो इंसान का व्यवहार कब और कैसा होगा ये तीन चीजों पर निर्भर करता है पहला अभाव, दूसरा स्वभाव तथा तीसरा प्रभाव, संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो इससे अछूता हो।  हर पल वो इनमें से किसी न किसी के दायरे में ही अपना व्यवहार निर्धारण करता है। इसके अलावा हमारा व्यवहार इस बात से भी प्रभावित होता है कि सामने कौन है….? उनका आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक कद क्या है…? इन सब से आगे हममें से हर कोई किसी न किसी वस्तु, व्यक्ति या व्यवस्था के खो जाने के डर और मोह के कारण भी सामने वाले से व्यवहार का निर्धारण करते है।

    अगर कोई बड़े ओहदे वाला व्यक्ति अपने कनिष्ट से बात करे तो शालीनता होना जरुरी है। केवल कनिष्ट ही अपने वरिष्ट के साथ शालीनता से बात करे यह सोचना शायद गलत है। मैं इस बात की सहमति देता हूँ की “सम्मान दो और सम्मान लो” हर वह इंसान जब सामने (छोटे-बड़े सब को) सम्मान देगा तो उनको भी सम्मान मिलेगा और मिलना भी चाहिए।।                                                                        कहा गया है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है, जब-जब जिस प्रकार की प्रवृति का बोल बाला रहता है , वैसे ही साहित्य की रचना होती है। फिर चाहे वो भक्तिकाल में लिखे रामचरितमानस हो या फिर वीर रस से परिपूर्ण पृथ्वीराज रासो या फिर सौंदर्य का वर्णन करता पद्मावत।

    “यह और बात है कि वो खामोश खड़े रहते है,

                      लेकिन जो बड़े होते है वो बड़े ही होते है”।

बड़प्पन और बड़बोलापन शब्द में ज्यादा अंतर नहीं है लेकिन इसके अर्थ में काफी अंतर है। बड़बोला व्यक्ति बड़ी-बड़ी बातें करता जरूर है लेकिन वास्तविकता से कोई लगाव नहीं होता है जबकि बड़प्पन वाला व्यक्ति शांत खड़े रहकर भी बड़ा पन दिखा देता है।

               बड़प्पन अर्थात् महानता, गुरुता, महत्ता, श्रेष्ठता या बड़े होने का भाव होना। बड़प्पन एक गुण है आप दूसरों की गलती माफ कर देते हैं और उसके भावों को भी समझ लेते हैं इसी में श्रेष्ठता और आपका बड़प्पन है। जो व्यक्ति दूसरों को छोटा समझकर खुद को बड़ा समझता है वह बड़ा तो हो सकता है परन्तु उसमें बड़प्पन नहीं हो सकता ।।

  “बड़े बड़ाई न करें बड़े न बोलें बोल।

              रहिमन हीरा कब कहे लाख टका मेरा मोल” ।।

केवल ड़े-बड़े बोल से कोई बड़ा नहीं हो सकता है बड़े होने के लिए हमें व्यवहार में भी बड़ा पन अर्थात बड़प्पन लाना होता है।

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3 thoughts on “व्यवहार

  1. महात्मा गान्धी के शब्दो में " अगर किसी कि असलियत जाननी हो तो देखो कि वह अपने से कमजोर तबके के लोगों से कैसा व्यवहार करता है।"

  2. सारगर्भित पोस्ट है। ऐसा ही होता है। सुना है गिरगिट बहुत अवसाद में है। क्योंकि इंसान उससे कही अच्छी तरह से रंग बदलना सीख लिएभी। बलवंत जी इसे ही अच्छी पोस्ट कहते है।

  3. सभी व्यक्ति के दिन प्रतिदिन से संबंधित पोस्ट लिखा है भैया.

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