संघर्ष-मेहनत और धैर्य

कई मित्रो ने सुझाव दिया कि मैं संघर्ष पर लिखूं ,कई दोस्तों ने कहा कि मैं खुद के संघर्ष पर लिखूं।
खुद के संघर्ष को कम या ज्यादा बता सकूँ ऐसा संघर्ष मैंने जीवन में किया ही नहीं है। हाँ जिसे बाकी लोग संघर्ष कहते हों उसको मैं मेहनत मानता हूँ और वही कर रहा हूँ । अब लक्ष्य की प्राप्ति कितने समय में होगी इसकी चिंता कभी हुई ही नहीं लेकिन हाँ संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य के मध्य जीवन में धैर्य अवश्य रहा है और आज मैं इसी विषय पर अपनी बात कहना चाहता हूँ ।
संघर्ष क्या है..??
दोस्तों आप सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी फिल्में जरूर देखी होंगी ।फिल्म हमारे जीवन को एक दिशा देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
किस लिए..!!

जीवन में कुछ सीखने के लिए, जीवन में आगे बढ़ने के लिए और अपने जीवन शैली को, व्यक्तित्व को, समाज को, देश को, समझने के लिए फिल्मों का अहम योगदान रहा है।जब फिल्में नहीं हुआ करती थी तो नाटक के माध्यम से या फिर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से और बड़े बुजुर्गो से सुने हुए किस्से कहानियो के माध्यम से जीवन को हमेशा एक दिशा मिलती रही है। हमेशा ही अलग-अलग कहानियों का प्रचार प्रसार होते रहा है और जैसे-जैसे तकनीकी विकास प्रारंभ हुआ वैसे वैसे इस पर नए-नए आविष्कार हुए, खोज हुई और हम आज हाईटेक तकनीको से फिल्म बनाने लगे हैं। अनेक रूप में फिल्मों को हमारे सामने प्रस्तुत किया जाने लगा । जैसे टीवी में कई अलग-अलग भाग के माध्यम से भी कहानियों को दिखाया जाता है वैसे ही फिल्मों का प्रारंभ हुआ तो थिएटर में फिल्म ढाई-ढाई घंटे की लगने लगी और अगर हम आज की बात करें तो आज ऑनलाइन के माध्यम से अनेक साइट वेबसाइट आ चुकी है जिस पर ऑनलाइन फिल्मों को घर बैठे देख सकते हैं । इसके लिए आपको कहीं जाने की आवश्यकता ही नहीं है और जब भी आप फ्री हों आप अपनी पसंद की फिल्मों को देख सकते हैं ।लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि फिल्म देखने से क्या लाभ है? ढाई घंटा समय बर्बाद करने का समय नहीं मिल पाता। कुछ लोग कहते हैं कि कौन बैठे ढाई घंटे तक..?? बहुत बोरिंग है, ऐसे विचार हो सकते हैं। लेकिन दोस्तों हर वह कहानी चाहे आप धारावाहिक के माध्यम से, नाटक के माध्यम से, कहीं नुक्कड़ के माध्यम से देखो या अपने आस पास बुजुर्ग बाबू जी, दादा जी, नाना नानी जी से सुने हों या फिर ढाई घंटे की फिल्म के माध्यम से देखो, प्रारंभ से लेकर अंत तक कहानी में आपको एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। हर कहानी में एक खलनायक होगा एक नायक होगा, नायक बुराई को खत्म करने के लिए लड़ता है और खलनायक जो बुराई को बढ़ाने के लिए लड़ता है। यही कहानी के मुख्य आधार होते हैं। उसी लक्ष्य को पाने के लिए नायक, खलनायक का पीछा करता है और एक समय ऐसा आता है कि कहानी के अंत में वह अपने लक्ष्य को पा लेता है । यही हर कहानी का मिलाजुला परिदृश्य होता है। इन सब के बीच मैं जो कहना चाह रहा हूं कि इस पर आप अपने जीवन से धैर्य को जोड़कर कैसे देख सकते हैं। जैसे कि फिल्मों से ही हम सीख सकते हैं कि फिल्म जब प्रारंभ होती है तो ज्यादा से ज्यादा 2 घंटे के बीच के होंगे लेकिन क्या कभी आपने फिल्म के चलते चलते प्रारंभ को देखें और उसके बाद ऐसा कभी हुआ हो कि आप बीच की कहानी को छोड़कर सीधा आखिर तक पहुंच जाएँ।
नहीं न..!! इस बीच कहीं ना कहीं हमरा धैर्य काम करता है और यही होता है कि कहानी को शुरू से लेकर अंत तक देखते हैं। दोस्तों मेरा कहना बस यही है कि आप अपने जीवन में भी यही धैर्य को बनाए रखें। आपका जीवन शुरु हुआ है आप अपने लक्ष्यों को पाने के लिए दौड़ रहे हैं और ऐसा समय जरूर आएगा जब आप अपने लक्ष्य को पा लेंगे। लेकिन उसके लिए कोई शॉर्टकट नहीं है आप शॉर्टकट ले सकते हैं। शॉर्टकट लिए तो आपकी जो मंजिल है, आपका जो लक्ष्य है वह स्थाई नहीं रह पाएगा। अगर जीवन में स्थायी लक्ष्य हासिल करना है तो आपको शॉर्टकट से बचना होगा।
लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित होना बहुत जरूरी है अन्यथा सफलता संदिग्ध हो जायेगी। साथियों जीवन में उतार चढ़ाव मिलेंगे जिस प्रकार फिल्मो में गीत संगीत और कही दुःख दर्द दिखाया जाता है वैसे ही वास्तविक जीवन में भी मिलेंगे लेकिन अंत में आप अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। इसलिए क्षणिक लक्ष्य या सफलता को छोड़िए और दीर्घकालिक सफलता के लिए संघर्ष, मेहनत करते हुए जीवन में धैर्य बनाये रखिये और हाँ फिल्म अवश्य देखिये।

–      बलवंत सिंह खन्ना
युवा विचारक, लेखक, कहानीकार

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2 thoughts on “संघर्ष-मेहनत और धैर्य

  1. आपने बिल्कुल सही लिखा है भैया जो धैर्ययता के साथ मेहनत करता है वही अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है और अपने जीवन में शांति और खुशी को अनुभव करता है

  2. बहुत शानदार लेख है प्रिय भाई जी बलवंत।आपके लेख का सार परिश्रम और धैर्य है।निश्चित ही जब सफलता एकाएक मिलती है उसकी तुलना में अधिक समय तक परिश्रम कर पाई गई सफलता की कीमत अधिक होती है धीरज धरने वाले व्यक्ति जीवन में शांत होते हैं ।धीरज खोने वाले व्यक्ति से ऐसे कार्य हो जाते हैं जो जीवन भर का पछतावा दे जाते हैं..।
    लेख के लिए बधाई एवं शुभकामनाए। 💐

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