जिन बच्चों को उनके माता पिता 20-22 वर्ष में व्यवहार कुशल नहीं बना सके उनको मैं मात्र डेढ़ घंटे की सफर में कैसे बना सकता हूँ दादा जी…

आज लगभग 2 वर्षो बाद रेल से सफर किया बिलासपुर से रायपुर की सफ़र मुम्बई मेल में करीब डेढ़ घंटे की रही। कोविड-19 प्रोटोकाल के मद्देनजर सुपरफास्ट ट्रेन में सामान्य टिकिट पर सफर अभी पूर्णतः बंद है लेकिन रसीद कटाकर(तत्काल अतिरिक्त शुल्क देकर) सफ़र में छूट लिया जा सकता है। मैंने भी आज बिलासपुर से रायपुर के लिए रसीद का सहारा लिया। बिलासपुर स्टेशन से दौड़ते( ट्रेन प्लेफॉर्म से निकल ही रही थी) हुए  ट्रेन में बैठा। ट्रेन में ज्यादा भीड़ नहीं थी लेकिन बैठने की जगह भी नहीं था इसलिए मैंने एक किनारे में ही खड़ा रहना ज्यादा मुनासिब समझा और अगले डेढ़ घंटे के लिए खुद से मानसिक सहमति लेते हुए रायपुर तक के सफर हेतु तैयार किया। ट्रेन में सामने ही 4 युवा (देखने से लग रहा था की 20-22 वर्ष के ही होंगे) लड़के भी खड़े रहें एवं वही पास सीठ पर एक सज्जन बुजुर्ग बैठे हुए थे। बिलासपुर से आगे बढ़ने पर उन 4 लड़को का लड़कपन शुरू हुआ, 4 में से 1 लड़का थोडा ज्यादा डेढ़साना(टपोरी भाषा में डेढ़साना ही कहा जाता है) लग रहा था। उन चारो ने पहले सब के सामने खुले में ही धुंवे उड़ाते हुए बीड़ी पिए फिर कुछ देर बाद सिगरेट भी और आगे फिर राजश्री कुटखा में तम्बाकू मिलाकर उसका भी सेवन किये। यह सब देखकर अंदर से मैं क्रोधित तो हो रहा था लेकिन मन में ख्याल आया की ‘मूर्खो से तो किनारा किया जाता है बहस नहीं’ बस इसी विचार ने मुझे उन युवाओं से बहस करने से रोक लिया, लेकिन जो सज्जन बुजुर्ग बैठे थे उसने हिम्मत कर के मेरी समझदारी और मर्दनिगी पर ही प्रश्न चिन्ह अंकित कर दिए। बुजुर्ग ने मुझसे कहा कि बेटा आप पुलिस(चूँकि मैं खाखी पेंट के साथ काला कमीज और पैरो में खाखी रंग का जूते पहन रखा था) में हो क्या?? मैंने कहा नहीं दादा जी मैं पुलिस में नहीं हूँ, आप ऐसा क्यू पूछ रहे हैं? क्या आपको किसी समस्या में सहायता चाहिए..?? उसने कहा बेटा इतने हष्ट पुष्ट होते हुए भी आपके सामने ये बद्तमीज लोग बीड़ी सिगरेट और तम्बाखू कुटखा खा रहे हैं पर आप चुप चाप देखे पड़े हो कुछ कहते क्यू नहीं। तब मैंने बड़ी शालीनता से उची स्वर में उन सज्जन से कहा कि दादा जी जिन बच्चों को 20-22 वर्ष आयु तक उनके माता पिता जी ने उचित शिक्षा नहीं दे पाये उनको व्यवहार नहीं सिखा पाये ऐसे व्यक्ति को भला मैं मात्र डेढ़ घंटे में कैसे समझा सकता हूँ। मेरी बातो से बुजुर्ग तो शांत हो गए पर उन ढीठ लड़को की सिगरेट लगातार जलती रही मानो अपने बाप दादाओं को सम्मान दे रहे हों।

नोट: शराब-सिगरेट,पान-गुटखा खाने वाले के पक्ष या विपक्ष मैं दोनों में नहीं हूँ लेकिन जो बच्चे अपने बाप के पैसो का गलत उपयोग करते हैं उनसे इतना जरूर कहना चाहूँगा की अपने पिता जी के पैसे कहाँ और किसके सामने उड़ा रहे हो इस बात की तमीज तो अवश्य सिख लो।

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One thought on “सफर

  1. आप कुछ भी करें लेकिन अपने से बड़ों का सम्मान करते हुए सार्वजनिक स्थान पर ऐसा कृत्य नहीं होना चाहिए ।

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