उनका हर दूसरे दिन फ़ोन आने लगा था कुछ न कुछ कामो को लेकर

लेकिन हर बार मेरा बस यही जवाब होता था कि साहब के बिना आदेश से मैं कोई भी मदद नहीं कर पाउँगा

मैं एक कर्मचारी मात्र हूँ

शुरू में वो मुझे अनेक प्रकार के लोभ से लुभाने का अथक प्रयास करते रहे

फिर आखिरकार उनको लगा कि बलवंत लिंक से हटके या व्यक्तिगत लाभ के लिए कार्य नहीं करेगा तब से धीरे धीरे उनका फ़ोन आना बंद हो गया।

जब लोगो को लगता है कि आप उनके काम के नहीं हो तो ओ धीरे धीरे आपसे दुरी बनाने लगते है ।

कुछ को लगता है कि मैं अड़यल हूँ

तो कुछ को लगता है मैं खड़ूस हूँ

पर ऐसा नहीं है मैं वास्तविक हूँ 

जो होगा वो जरूर होगा

जो नहीं होगा वो मुझसे होगा ही नहीं

आपको झूठी तस्सली देकर मुह में वाह वाही लूँ फिर बाद में काम न आ सकूँ ऐसे तस्सली का कोई औचित्य नहीं है। 

जो बात वास्तविक में हो वही बोलूं यही मेरी फितरत रही है।

हाँ मुझमे इगो जरूर है

और मैंने यह इगो खुद से कमाई है

मेरी इगो ही मेरी पूंजी है

जिस दिन इगो से समझौता कर लूंगा उस दिन मेरी खुद की कोई पहचान या स्वाभिमान नहीं होगी।

मैंने जिल्लत भी सही है

तो मैंने धुत्कार भी झेले है

मैंने तिरस्कार भी देखे हैं जीवन में अपने, तो कईयो से नजरअंदाज भी हुआ हूँ।

हाँ मैंने यह इगो खुद से कमाई है

इसलिये बलवंत ने ऐसी छवि बनाई है।

छवि..!!! 

कैसी छवि..?

क्या है छवि..??

वही जो आप हो या न हो लेकिन आपके अनुपस्थिति या कहें आपके पीठ पीछे गढ़ी या मढ़ी जाने वाली व्यक्तित्व

वह छवि जिससे आपके सोच आपके कार्यों आपके व्यवहार को नापा और जांचा जा सके।

छवि वह जो आप खुद नहीं बना सकते इसको आपके आस पास के साथी गण किसी अन्य के सामने अपने लाभ या हानि के अनुरूप बनाया करते हैं।

छवि के किरदार आप हों लेकिन निर्देशक वह होता है जो आपकी छवि किसी और के सामने गढ़ रहा होता है।

पता ऐसे लोगो को क्या कहते हैं

ऐसे को ज्ञान पुरुष कहा जाता है 

जिसे आप वर्तमान टेक्निकल युग में गूगल बाबा भी कह सकते हैं।

ऐसे लोग हर विषय, हर चीज की जानकारी रखते हैं

जितना आप खुद को नहीं जानते होंगे उतना ए आपको जानते हैं।

ऐसे लोगो से बचकर रहिये और अपनी स्वाभिमान को बचाकर रखिये

जिस दिन आप अपने स्वाभिमान से समझौता किये तब मान लेना की सामने वाले के द्वारा बनाये गए छवि का आप किरदार हो चुके हो।

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One thought on “स्वाभिमान

  1. स्वाभिमान हर किसी इंसान के जीवन मूल्यों का एक पैमाना होता है। किसी भी व्यक्ति का स्वाभिमान उसे मूल्यों से विचलित नहीं होने देता। अच्छा प्रयास है। लिखते रहिए।

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