हर घर में अँधेरा रहता है जब तक माँ न जग जाये

हर घर में अँधेरा रहता है जब तक माँ न जग जाये

बात तब से और तब की है जब प्रकाश के लिए सूरज की रौशनी ही हुआ करती थी वैसे तो बिजली की खोज हो चुकी थी और गांवों में एकल  बिजली योजना के तहत हमारे घर में भी  बिजली लग गई थी लेकिन जितने देर तक बिजली रहती नहीं थी उससे ज्यादा देर तक तो बिजली  गुल रहा करती थी। तब गांवों के हर घर में आपको मिट्टी तेल से जलने वाली चिमनी मिल जाया करती, फिर धीरे से चिमनी के बाद कंडील आया और फिर कैंडल उसके बाद अब तो हमारा प्रदेश ऊर्जा राज्य है तो दिन भर बिजली ही बिजली है, सब जान ही रहे हैं। अब गांव में हमारा कच्चे मकान के जगह पक्का मकान भी बन गया है एवं हर कमरे में LED लाइट भी लगे है अब केवल सूरज की रौशनी के अलावा कृत्रिम रौशनी भी है, कुछ तो सूरज से ही लिया गया सोलर ऊर्जा भी है अब आप बोलोगे कि मैं प्रकाश की बात क्यू कर रहा हूँ तो बात ऐसी है कि चाहे घर में हो या अपने जीवन में बिना रौशनी के जीवन अंधकार है। जिस प्रकार प्रकृति में सूरज की रौशनी है उसी प्रकार हमारे जीवन में ममतामई माँ के द्वारा रौशनी विद्यमान है। मुझे याद है जब बचपन में पूरा परिवार घर में सो रहे होते थे तब सुबह-सुबह 4 बजे से ही घर में माँ की दिनचर्या प्रारंभ हो जाया करती थी तब माँ ही सुबह पहले चिमनी से फिर समय के साथ साधन भी बदलते गये चिमनी के बाद कंडील से फिर अब बिजली से घर में उजाला फैलाती थी यह आज पर्यन्त जारी हैं। माँ सुबह सबसे पहले उठकर घर में उजाला फ़ैलाने के साथ ही घर के कामों में लग जाती हैं मैंने हमेशा देखा है घर में रोज वही काम कर के भी माँ कभी ऊब नहीं गईं।  दिन भर व्यस्त रहतीं माँ थक कर भी कभी अपनी थकान नहीं बताती हैं। माँ हैं तो घर और जीवन दोनों में ही उजाला है। आज मातृ दिवस पर अपनी माँ के अलावा हर उस माँ को प्रणाम जिनके बदौलत हम बच्चों के जीवन में उजाला है। आज या किसी भी एक दिन सुबह माँ के सोकर उठने के समय में ही उठना और पूरी दिन माँ की मेहनत को देखना उनकी दिनचर्या को देखना और समझने की कोशिश करना उनकी मेहनत, उनकी ममता, उनका ध्यान, उनकी परवाह, उनकी चिन्ता, उनकी भावना, वही मातृ दिवस पर माँ के लिए सच्ची सम्मान होगी।

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