समुदाय
समुदाय मुख्यतः 3 प्रकार के होते हैं
ग्रामीण समुदाय,शहरी समुदाय और जनजातीय समुदाय
आज वैश्वीकरण के दौर में जिस तरीके से अंधाधुंध शहरीकरण हो रहा है या यूँ कहे विकास के नाम पर सीमेंटीकरण हो रहा है उसमे सबसे ज्यादा नुकसान है तो वो है ग्रामीण समुदाय।
ग्रामीण समुदाय जिनको मध्यम स्तर माना जाता रहा है शहरी समुदाय जिसे आज भी उच्च समुदाय माना जाता है और आखिर में जनजातीय समुदाय जिसे आज भी निम्न स्तर माना जाता है वास्तविक में यह समुदाय आज भी निम्न स्तर में ही है जो समाज के मुख्य धारा से कोसो दूर है।
शहरीकरण हो या शहर की बसाहट हो या फिर किसी शहर की विकास हो इन सब में सबसे ज्यादा योगदान होता है ग्रामीण समुदाय की,
मानव संसाधन से लेकर अन्य सारे संसाधन आज भी ग्रामीण समुदाय से ही उपलब्ध किया जाता है।एक शहर निर्माण में मजदुर, कच्चा माल,लकड़ी, मिटटी इत्यादि ग्रामीण समुदाय से ही उपलब्ध किया जाता है। ग्रामीणों के अथक मेहनत और परिश्रम से ही शहर का विकास होता है साथ ही शहरो में खाद्य सामग्री की उपलब्धता भी ग्रामीण समुदाय से पूरा होती है।
इसलिए यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा की ग्रामीण समुदाय ही उच्च समुदाय है।
लेकिन यह समुदाय प्रारम्भ से ही उपेक्षा का शिकार होते आया है।
ग्रामीण से विकास के नाम पर जमीने ले लो सड़क निर्माण के नाम पर, उद्योग के नाम पर, खनिज उत्खनन के नाम पर और न जाने किस किस नाम पर आप ग्रामीणों से उनकी संसाधन ले लो लेकिन बदले में उनको कुछ भी न दो और दोगे भी तो केवल खानापूर्ति के लिए।
आज केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं पुरे भारत सरकार सम्पूर्ण ग्राम में बिजली पहुँचाने के नाम पर वाहवाही लूट रही है बड़े बड़े पोस्टर विज्ञापन दिये जा रहे हैं लेकिन वास्तविकता इससे कोसो दूर है आज भी गांवों में मुलभुत सुविधाएं नहीं है न अच्छे पेयजल है न स्वास्थ्य सुविधा है, न ही शिक्षा है, न ही सड़के हैं। आज मेरे गृह ग्राम हिर्री पोस्ट ससहां थाना पामगढ़ जिला जांजगीर चाम्पा छत्तीसगढ़ में सुबह 10 बजे लेकर शाम 4 बजे तक बिजली गुल थी और प्रायः हर दूसरे दिन का यही खेल है किसलिये कोई नहीं जनता है हमारे हक़ का बिजली या तो शहरो को दिया जाता है या फिर उद्योग घरानो को,
हमारे हिस्से का पेयजल या कृषि सिंचाईं जल बड़े बड़े उद्योगों को दिया जाता है, लेकिन संसाधन ग्रामीण समुदाय का ही उपयोग करेंगे आखिर ऐसा उपेक्षा क्यों और कब तक क्या ग्रामीण समुदाय को आप इतना कमजोर समझते हो जो विकास के नाम पर आप ऐसे झुनझुना देते रहोगे सड़क चौड़ीकरण या उद्योग स्थापित करने के नाम पर आप ग्रामीणों की जीवन भर आजीविका का साधन उनकी जमीनेँ छीन लेते हो मुवावजे के नाम पर जो राशि दी जाती है ओ साल दो साल में खर्च हो जाते हैं ग्रामीण इतने अर्थशास्त्री नहीं या व्यवसायिक प्रबंधन वाले नहीं की अपनी पूंजी किसी अच्छे जगह निवेस कर सके साल दो साल बाद न उनके पास कोई आजीविका होती है न ही आजीविका के लिये कोई संसाधन।
वर्तमान की जो विकास नीति है वह केवल एक पक्षीय है जो केवल एक उच्च वर्ग का ही विकास करना चाहती हैं या उनके लिये ही सरकार काम कर रही है। वर्तमान में जो हालात किसानो की है वह किसी से छिपी नहीं है उसके लिये जो शांति तरीके से अपनी आवाज और मांग रखने के लिये देश के विभिन्न हिस्सों में गांव बंद आंदोलन चल रहा है उससे खाद्य सामग्री खासकर कच्चे पदार्थ जैसे दूध, दही, फल, सब्जी इत्यादि के लिये हाहाकार मची हुई है ।सोचो आहार किसान केवल एक मौसम के लिये कृषि कार्य बंद कर दे तो देश का क्या हाल होगा और सायद यह किसी न किसी समय अवश्य होगा और तब सायद मैं भी उस आंदोलन का हिस्सा रहूँ।
ग्रामीणों से लिया हुआ संसाधन आखिर उनके विकास के लिये उपयोग क्यू नहीं किया जाता है क्यू उनको मीठा झुनझुना थमाया जाता है तात्कालिक उदाहरण के लिये छत्तीसगढ़ में जसपुर जिला में जो पत्थरगड़ी आंदोलन सामने आया है वह इसका जीता जगता सबूत है की जनजातीय और ग्रामीण समुदाय को आप अत्यधिक उपेक्षा कर दिये हो। आखिर जो सुविधा उनको मिलनी चाहिये जससे वह दूर क्यू रहे।
अगर बिजली है तो 24 घंटे बिजली होनी चाहिये,अगर स्वास्थ्य सुविधा है तो 24 घंटे के साथ साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा होनी चाहिए अगर शिक्षा है तो बेहतर और उपयोगी शिक्षा होनी चाहिये अगर सड़के हैं तो बेहतर सड़के होनी चाहिये पेयजल है तो बेहतर पेयजल सुविधा होनी चाहिये।
जो संसाधन का उपयोग आप विकास के नाम पर कर रहे हो उसका वास्तविक हक़ ग्रामीणों को मिलना ही चाहिये वरना सोचो किसी दिन किसान कृषि कार्य बंद कर दें पुरे मौसम के लिये अगर ग्रामीण क्षेत्रो से मजदर मजदूरी करने शहर न जाएँ, कच्चे खाद्य सामग्री किसी दिन शहर ना  पहुचे तो क्या होगा देश का जरा सोचो जो जवाब देह हो उनसे मेरा सवाल।
कॉपी राइट
एम बी बलवंत छत्तीसगढ़िया युवा सामाजिक कार्यकर्ता

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *