महिला दिवस पर एक पुत्र की कलम 🖊️ से मेरी माँ इंद्राणी….

इंद्राणी यानी मेरी मां… मां अब केवल चूल्हा- चौका के साथ परिवार ही नहीं चलाती… बल्कि अब वह एक सशक्त और जिम्मेदार महिला है। दफ़्तर जाकर प्रशासन चलाती है। महिला सशक्तिकरण का जब-जब ज़िक्र आता है, मुझे पहली सूरत मेरी माँ की सामने आती है।
हाँ मेरी माँ इंद्राणी…! छत्तीसगढ़ के एक ज़िले की प्रशासनिक अधिकारी हैं। प्रशासनिक अधिकारीं का मतलब लॉ एंड ऑर्डर को नियंत्रित करने वाली ज़िला पुलिस अधीक्षक। हां…हां… एसपी मेडम हैं मेरी मां।
वह दौर कुछ और था… और आज कुछ और है। यह स्थिति आज जितना सरल और अच्छी लग रही है वर्षों पहले ऐसा नहीं था। आज मेरी उम्र महज 22 वर्ष है। 12 साल पहले जब मैं चौथी कक्षा में हुआ करता था तब मेरे पिताजी प्रदेश के घोर नक्सल ज़िला के पुलिस अधीक्षक हुआ करते थे। ड्यूटी के दौरान एक नक्सल ऑपरेशन में पिता जी शहीद हो गए। उस समय मेरी मां गृहणीं थीं, केवल घर के काम काज करती थीं, ऐसा नहीं कि वो पढ़ी लिखी नहीं थी। पिता जी के बराबर ही शिक्षित थी। जब पिताजी शहीद हुए तो मां ने अबला नहीं बल्कि एक सबला नारी के रूप में एक नया जीवन शुरू किया। माँ ने पिताजी के बदले अनुकंपा नियुक्ति को ठुकरा कर खुद नए सिरे से प्रशासनिक सेवा में चयन के लिए यूपीएससी की तैयारी शुरू की। राजधानी रायपुर में रहकर माँ को मिलने वाली मासिक पेंशन से ही मेरी भी पढ़ाई पूरी हुई। इधर कड़ी मेहनत से अगले 4 साल में ही यू. पी. एस. सी पास कर मां आईपीएस अफसर बन गईं। आज पूरे 12 साल बाद जिले की कमान मां के हाथों में है। माँ जब पहली बार ज़िला पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्त हुईं तब वही ज़िला का चयन की जहां पिताजी शहिद हुए थे। पिता जी के जाने का दुख हमेशा से है और पूरे जीवन रहेगा लेकिन मेरी मां महिला शक्ति एक जीता जागता उदाहरण है। मेरे लिए मेरी मां मेरी आदर्श हैं, आज महिला दिवस पर मेरी माँ को महामहिम राष्ट्रपति के हाथों बेहतर लॉ एंड ऑर्डर सँभालने और घोर नक्सली क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए सम्मान मिल रहा है। जहाँ एक ओर कई महिलाएँ ऐसे विषम स्थिति में ख़ुद को कमज़ोर मानकर हर मान लेती हैं वही मेरी माँ एक सशक्त भूमिका को स्वीकार की। मेरी मां मेरे लिये सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने की राह है। हर बहन, हर बेटी, हर बहू को ऐसे सशक्त होने की ज़रूरत है। जो विषम परिस्थिति पर कमजोर नहीं बल्कि मज़बूती के साथ उभरें।
महिला दिवस पर मेरी माँ इंद्राणी को एवं हर उस माँ को सादर प्रणाम जिसने सिंगल मदर के रूप में ख़ुद को और अपने बच्चों को सशक्त बना रहीं हैं।

लेखक- बलवंत सिंह खन्ना
स्वतंत्र लेखक एवं कहानीकार

(नोट-उपर्युक्त कहानी लेखक का निजी कहानी संग्रह है। कहानी में उपयुक्त नाम, पात्र या स्थान अगर किसी से मेल खाता है तो यह मात्र एक सयोंग कहलाएगी।)

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